!! अंतरास्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस महज एक ड्रामा !! अंजलि शर्मा ! !!

अंतिम अपडेट 08-Mar-2018 12:20:15 pm

ब्यूरो बिलासपुर

अंतरास्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस मनाने वाली महिलाओं से अनुरोध है कि एक दिन में जो महिला दिवस पर जो ड्रामा होता है उसे बन्द करो क्योंकि यह सब सच्चाई से परे ओर हटकर है।दिन प्रतिदिन बाद रहे बलात्कार और हत्याएं तुम्हे नजर नही आ रही है।जब किसी महिला और बच्ची का बलात्कार होता है उस वख्त इस घिनोने कृतयज्ञ के खिलाफ आवाज उठाने की जगह तुम कहां होती हो।अक्सर देखा जाता है कि एक महिला
जब घर से अकेली कमाने निकलती है तो बाहर बहुत से असमाजिक तत्वों की बुरी नजर होती है जो महिलायें इन लोगो से बचकर आगे बढ़ना चाहती है उनकी कोई भी समाज का व्यक्ति सहायता करने की जगह उसके ऊपर बेवजह कीचड़ उछालता है और कुछ महिलाएं इन लोगो के शोषण का शिकार तक बन जाती है। 

बिना स्वार्थ के इस समाज मे कोई भी व्यक्ति किसी महिला का सहयोग नही करता और जो अपने स्वाभिमान से जीती है उसके आगे बहुत सी कठिनाइयां ओर संघर्ष छुपा होता है। परंतु आवश्यकता पड़ने पर कोई भी समाज का व्यक्ति सहायता के लिए नही आता है।

हर वख्त घुट घुट कर जीती है सिर्फ अपने परिवार के पालन पोषण के लिए वह मजबूरन जिंदगी काट रही होती है। उसकी बेबसी को कोई नही समझ पाता है।उसके अंदर छुपे दर्द को भी कोई नही समझ पाता है। वर्ष में एक दिन मनाए जा रहे इस ड्रामे को लेकर हैरानी भी होती है। आये दिन महिलाओं पर छींटाकसी करना समाज के आम लोग ही नही बल्कि  आजके राजनीतिक तत्वों को देखा जाता है। इन असमाजिक तत्वों द्वारा देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी तक को भी बदनाम करते देखा है। यहां तक कि सोनिया गांधी जो बेशक विदेश में पैदा हुई है फिर भी भारत देश की बहू है उन पर राजनीतिक द्वेषभाव से छींटाकसी की जा रही है जिससे स्पस्ट होता है कि भारत देश मे बहु बेटी  की कभी इज्जत नही की जाती। स्मृति ईरानी का नाम देश के प्रधानमंत्री के साथ जोड़कर बदनाम किया जाता है। 

इस देश मे महिला कहीं भी मजबूत नही है बस समाज के भेडियो सेे खुद को बचाकर अपने परिवार को पाल रही है। और हर वख्त भय में रहती है कि उनके परिवार में जो बेटियां है उन्हें इस समाज के अंदर जो भेड़िये है उनसे कैसे बचाया जा सके।
हाल ही में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा की लाचारी तक देखने को मिली जब वह नाबालिग बच्चियों के साथ हो रहे बलात्कार और आपराधिक मामलों को रोकने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने गई परन्तु महिला पुलिस प्रशासन ने उन्हें धके मारकर बाहर किया ।

सबसे पहले तो यह दृश्य देखकर स्पस्ट होता है महिला ही महिला की दुश्मन है दूसरी बात की पुलिस प्रशासन एवम सरकार दोनों ही समाज मे महिलाओं पर बढ़ रहे अपराधों में साँझीदार है।दूसरी तरफ जहां महिला आयोग की अध्यक्ष ही सुरक्षित नही वहां समाज की आम महिलाओं को कोंन सुरक्षा देगा। एक दिन के महिला दिवस के इस ड्रामे में महिलाएं दिल का दर्द दबाकर सिर्फ दिमागी विचारधारा से स्वयम को गुमराह करती है।


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